Thursday, July 9, 2020
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सॉवरेन बॉण्ड Sovereign Bonds

सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) अर्थात संप्रभु बॉंड एक ऐसा स्पेसिफिक ड्राफ्ट इंस्ट्रूमेंट अथवा प्रतिभूति जिसे सरकार जारी करती है। इससे विदेशी और घरेलू मुद्रा दोनों में ही जारी किया जा सकता है। भारत ने अभी तक केवल घरेलू मुद्रा में ही सॉवरेन बॉण्ड (Sovereign Bonds) जारी किए हैं।

अन्य बॉन्ड्स की तरह सॉवरेन बॉन्ड बॉण्ड (Sovereign Bonds) भी ख़रीदार को निश्चित समयावधि के लिए ब्याज की एक निश्चित राशि का भुगतान करने और परिपक्वता पर अंकित मूल्य चुकाने का वायदा करते हैं।

दुनिया की कुछ देशों के जाने-माने देशों के सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds):

  • अमेरिका का ट्रेज़रीज
  • ब्रिटेन का गिल्ट्स
  • फ़्रान्स का ओट्स
  • जर्मनी का बन्डेसन्सेहेन अथवा बंडल
  • जापान का JGBS आदि।

सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) चर्चा में क्यों ?

वित् मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में फॉरेन सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) का ज़िक्र किया था।इस बॉन्ड के ज़रिए अपनी सकल उधारियों का एक हिस्सा विदेशी बाज़ारों से प्राप्त करने की सरकार की मंशा है।

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सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) क्यों महत्वपूर्ण है?

सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds)
  • वैश्वीकरण बाज़ार सूचकांक में भारत के सरकारी बॉन्ड को शामिल करने में सहायक, जिससे भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह में बढ़ोतरी होगी।
  • सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) के ग्लोबल बेंचमार्क में शामिल होने से खरीददारों को Rupee denominated sovereign bonds भी आकर्षित करेंगे।
  • जिस दर पर सरकार सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) के ज़रिए विदेशों से उधार लेगी, वह इसकी कॉर्पोरेट बॉण्ड के मूल्य निर्धारण के लिए मानदंड स्थापित करेगा, इससे विदेशों से धन जुटाने में इंडियन कंपनीयो को मदद मिलेगी।

सॉवरेन बॉन्ड (Sovereign Bonds) के ख़तरे क्या है?

  • भारत में विदेशी मुद्रा की बढ़ोतरी से भारतीय मुद्रा के मूल्य में गिरावट आएगी।
  • रुपये की अधिमूल्यन से निर्यात के के बजाय आयात को बढ़ावा मिलेगा।
  • Dolla- denominated bonds ग्लोबल इंटरेस्ट रेट के प्रतिक होते हैं, इनकी अत्यधिक संवेदनशीलता भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
  • मौजूदा वक़्त में भारतीय ऋण में विदेशी निवेशकों की भागीदारी कम हो रही है। भारतीय ऋण में विदेशी निवेशकों की भागीदारी सरकारी प्रतिभूतियों की मात्र 3.6% है, जबकि मलेशिया (24%) इंडोनेशिया में 40% की भागीदारिता है।
  • आधारित बॉन्डस स्टॉक के कम होने से घरेलू बचत डाकघर जमाओं पर ब्याज दरों में गिरावट आ सकती है।

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