Tuesday, June 2, 2020
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Human right (मानवाधिकार ) full notes in hindi


मानवाधिकार (Human right) से तात्पर्य उन सभी अधिकारों से है जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्टा से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा ऐसे अधिकार जो अंतर्राष्ट्रीय समझौते के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा स्वीकार किये गये है और देश के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है, को मानव अधिकार माना जाता है । इन अधिकारों में प्रदूशण मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार, अभिरक्षा में यातनापूर्ण और अपमानजनक व्यवहार न होने संबंधी अधिकार, और महिलाओं के साथ सदव्ययवहार का अधिकार शामिल है।

Human rights (मानवाधिकार ) full notes in hindi


मूल अधीकार व मानवाधीकार में अंतर:- मानव को मानव होने के नाते प्राप्त अधिकार मानवाधिकार कहलाते है, ये किसी देश की सीमा में बँधे नहीं होते। जबकि मूल अधिकार मानव को नागरिक होने के नाते देश/राज्य द्वारा प्रदान किए जाते है। 
मानवाधिकारो की पृष्ठ भूमि: 10 दिसम्बर, 1948 को संयुक़्त राष्ट्र संघ द्वारा मानवाधिकारो का सार्वभोमिक घोषणा पत्र जारी किया गया था। इसी दिन से मानवाधिकारो की क़ानून शुरूवात मानी जाती है, जबकि कई देशों ने इन अधिकारो से सम्बंधित क़ानून बाद में निर्मित किए।
Note:-
  1. 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है।
  2. 10 दिसम्बर को ही शांति का नोबेल पुरस्कार भी दिया जाता है। (नार्वे गणराज्य में) 

भारत में मानवाधिकार:- 
  • 28 सितम्बर, 1993 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा मानवाधिकार संरक्षण हेतु अध्यादेश पारित किया गया।
  • संसद द्वारा इसे वैधानिकता प्रदान करने के लिए मानवाधिकार संरक्षण विधेयक,1993 पारित किया गया। इस अधिनियम को 8 जनवरी, 1994 को मान्यता मिली जबकि इसके प्रभावी होने की तिथि 28 सितम्बर को ही माना जाता है। (परीक्षा उपयोगी )

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में तीन आयोगों का उल्लेख किया गया है:-
  1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।
  2. राज्य मानवाधिकार आयोग।
  3. मानवाधिकार न्यायालय। ↴
Note:- वर्ष 2006 में इस अधिनियम को संशोधित किया गया। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व राज्य मानवाधिकार आयोग के बारे में ऊपर दिए लिंक से पढ़ सकते है।

मानवाधिकार न्यायालय


इसका प्रावधान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम,1993 में किया गया था। इस अधिनियम के अनुसार-

  • प्रत्येक जिले में एक न्यायालय होगा।
  • उच्च न्यायालय के मुख्य नययाधिश की सलाह पर राज्य सरकार द्वारा इसकी स्थापना की जाएगी।
  • राज्य सरकार इसमें अपना लोक अभियोजक/वक़ील नियुक्त करती है। इसकी नियुक्ति के लिए इसे कम से कम सात वर्षों का वकालत का अनुभव होना आवश्यक है।
  • यह न्यायालय मानवाधिकार से सम्बंधित मुद्दों पर सुनवाई करता है।

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