Saturday, July 11, 2020
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Chandrayaan 2 full notes in hindi

Chandrayaan 2: चंद्रमा पृथ्‍वी का नज़दीकी उपग्रह है जिसके माध्यम से अंतरिक्ष में खोज के प्रयास किए जा सकते हैं और इससे संबंध आंकड़े भी एकत्र किए जा सकते हैं। यह गहन अंतरिक्ष मिशन के लिए जरूरी टेक्‍नोलॉजी आज़माने का परीक्षण केन्‍द्र भी होगा। चंद्रयान 2, खोज के एक नए युग को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष के प्रति हमारी समझ बढ़ाने, प्रौद्योगिकी की प्रगति को बढ़ावा देने, वैश्विक तालमेल को आगे बढ़ाने और खोजकर्ताओं तथा वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करने में भी सहायक होगा।

Chandrayaan 2 चर्चा में क्यों ?

Chandrayaan 2
image credit- firstpost
  • भारत का दूसरा चंद्र मिशन “Chandrayaan 2” 22 जुलाई 2019 को दोपहर के 2:42 पर लॉन्च हुआ।
  • यह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्चिंग हुआ।
  • क़रीब 10 सालों के वैज्ञानिक अनुसंधान और अभियांत्रिकी विकास के बाद “Chandrayaan 2” भेजा गया।
  • यह मिशन चंद्रमा की दक्षिणी हिस्सों के बारे में जानकारी जुटाएगा ।

Chandrayaan 2 की विशेषताएँ

Chandrayaan 2
  • इसे पृथ्वी की 170 X 39,120 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया।
  • Chandrayaan 2 से चंद्रमा की भोगोलिक संरचना, भूकम्पीय स्थिति, खनिजों की मौजूदगी और उसके वितरण का पता लगाने, सतह कि रासायनिक संरचना, मिट्टी के ऊपरी परत की ताप भौतिकी विशेषताओं का अध्ययन करके चन्द्रमा के अस्तित्व में आने तथा उसके क्रमिक विकास के बारे में नई जानकारियां मिल पाएगी।
  • Chandrayaan 2 में एक orbitor एक Lander और एक Rover शामिल किया गया है।
Chandrayaan 2
  • Lander का नाम: विक्रम
  • Rover का नाम: प्रज्ञान
  • ऑर्बिटर पेलोड 100 किलोमीटर दूर की कक्षा में से रिमोट सेंसिंग अध्ययन करेगा जबकि लैंडर और रोवर पे-लोड लैंडिंग साईट के नज़दीक है इन-सीटू आंकड़े एकत्र करेगा।
  • चंद्रमा के चट्टानी क्षेत्र रेगोलिथ की विस्तृत 3D मैपिंग की जाएगी।
  • चंद्रमा के आयन मंडल में इलेक्ट्रॉन घनत्व और सतह के पास प्लाज़्मा वातावरण का भी अध्ययन किया जाएगा।
Chandrayaan 2
मिशन के उद्देश्य
  • चंद्रमा की सतह के ताप, भौतिकी गुणों और वहाँ की भूकंपीय गतिविधियों को भी मापा जाएगा।
  • इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी सिंथेटिक अपर्चर रेडियोमेट्री और पोलरीमैट्री की सहायता से और व्यापक स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों से चाँद पर पानी की मौजूदगी के ज़्यादा से ज़्यादा आंकड़े इकट्ठे किए जाएंगे।

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Chandrayaan 2 के महत्वपूर्ण तथ्य

  • चाँद के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ़्ट लैंडिंग करने वाला Chandrayaan 2 पहला अंतरिक्ष मिशन है।
  • भारत विश्व का चौथा देश है जिसने चंद्रमा की सतह पर सॉफ़्ट लैंडिंग की।
  • इससे पहले केवल अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ ने सॉफ़्ट लैंडिंग की है ।
  • बाहुबली के नाम से प्रसिद्ध प्रक्षेपण यान GSLV MK III थर्ड के ज़रिए भेजा गया है यह Chandrayaan 2
  • तत्कालिक प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 15 अगस्त 2003 में चंद्रयान कार्यक्रम की घोषणा की थी।
  • Chandrayaan-1 वर्ष 2008 में लॉन्च किया गया था।
  • Chandrayaan-1 ने चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की उपस्थिति की पुष्टि की थी।

GSLV MK III के बारे में विशेष तथ्य

Chandrayaan 2
GSLV MK III
  • भारत का सबसे भारी तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है।
  • 4 टन वज़नी पेलोड को GTO (geosynchrous transfer orbit) या लगभग 10 टन वज़नी पेलोड को Low earth orbit मैं छोड़ने की क्षमता।
  • इसके पहले चरण में दो S-200 बूस्टर्स हैं जिनमें हो ईंधन का उपयोग होता है।
  • दूसरा चरण L-110 कोर स्टेज का है जिसमें तरल इंजन का उपयोग होता है।
  • उनका तीसरा चरण C-25 क्रायोजेनिक इंजन होता है। क्रायोजेनिक इंजन की विशेषता यह है कि यह तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन को -183 डिग्री सेंटीग्रेड और -253 डिग्री सेंटीग्रेड पर संग्रहित करते हुए प्रयोग करता है।

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Chandrayaan-2 के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न

1. चंद्रयान-1 क्या है?

चन्‍द्रयान-1 चन्‍द्रमा पर भेजा गया भारत का पहला मिशन था। संस्‍कृत और हिन्‍दी में ”चन्‍द्र” का अर्थ है चन्‍द्रमा और ”यान” कहते हैं वाहन को अर्थात चन्‍द्रमा पर भेजा गया अंतरिक्ष वाहन।

2. चंद्रयान-1 कब और कहाँ से छोड़ा गया ?

चन्‍द्रयान-1 भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी-सी II से 22 अक्‍टूबर 2008 को श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से छोड़ा गया था।

3. चंद्रयान-1 कब तक काम करता रहा?

इस अंतरिक्ष यान ने चन्‍द्रमा की 3400 से ज्‍यादा परिक्रमाएं कीं और यह 312 दिन अर्थात 29 अगस्‍त तक काम करता रहा ।

4. चंद्रयान-1 पर कौन कौन से वैज्ञानिक उपकरण रखे गए थे?

चन्‍द्रयान-1 पर 11 वैज्ञानिक उपकरण रखे गये थे। इनमें से पांच भारतीय थे और शेष छह ई एस ए (3), नासा (2) और बुल्‍गारियाई विज्ञान अकादमी (1) के थे जिनका चयन इसरो की घोषणा (ए ओ) के जरिये किया गया था। ई एस ए वाले दो उपकरण भारतीय सहयोग से विकसित किये गये थे।

5. चंद्रयान-1 की क्या उपलब्धियां रही थी?

चन्‍द्रयान-1 चन्‍द्रमा पर पानी होने की पक्‍की पुष्टि की। यह खोज सबसे अलग थी। चन्‍द्रयान-1 ने चन्‍द्रमा के उत्‍तरी ध्रुव क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी जमा होने की भी खोज की। इसने चन्‍द्रमा की सतह पर मैग्निशियम, एल्‍युमिनियम और सिलिकॉन होने का भी पता लगाया। चन्‍द्रमा का वैश्विक मानचित्र तैयार करना इस मिशन की एक और बड़ी उपलब्धि थी।

6. चंद्रमा का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?

चन्‍द्रमा के अस्तित्‍व में आने और उसके क्रमिक विकास से जुड़ी जानकारी प्राप्‍त करके हमें समूचे सौरमंडल और हमारी पृथ्‍वी का इतिहास समझने में सहायता मिलेगी।

7. चंद्रमा का तापमान कितना है?

चंद्रमा का तापमान अत्‍यधिक ज्‍यादा और अत्‍यधिक कम है। इसके जिस भाग पर सीधे सूर्य की रोशनी पड़ती है वहां 130 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होता है और बेहद गर्मी रहती है। पर रात के वक्‍त यह शून्‍य से 180 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है और जबर्दस्‍त ठंड रहती है।

8. क्या चंद्रमा पर जीवन है?

अभी तक किसी चंद्र मिशन को चंद्रमा पर जीवन होने के प्रमाण या संकेत नही मिले हैं।

9. हमें चंद्रमा का एक ही भाग क्यों दिखाई देता है?

चंद्रमा के परिक्रमा करते रहने के कारण पृथ्‍वी की तरफ उसका वही एक भाग दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि पृथ्‍वी की गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति के चंद्रमा के घूमने की गति इतनी कम हो जाती है कि उसे अपनी धूरी पर घूमने में उतना ही समय लगता है जितना उसे पृथ्‍वी की परिक्रमा पूरी करने में लगता है जो 27 दशमलव तीन दिन के बराबर है।

10. चंद्रमा पृथ्वी से कितना दूर है?

पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच औसत दूरी 3,84,000 किलोमीटर है।

11. चंद्रमा पृथ्वी से कितना अलग है?

चंद्रमा का व्‍यास करीब 3,476 किलोमीटर है जो पृथ्‍वी के व्‍यास का एक चौथाई है। चंद्रमा का भार पृथ्‍वी के भार से 81 गुणा कम है। चंद्रमा की सतह पर गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति पृथ्‍वी की गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति के सिर्फ छठे भाग जितनी है। चंद्रमा पर पृथ्‍वी जैसा वायुमंडल नही है और इसीलिए वहां तरल पानी नही है।

12. चंद्रयान 2 क्या है?

चंद्रयान-2 असल में चंद्रयान-1 मिशन की ही अगली कड़ी है। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं।

13. चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 में क्या अंतर है?

चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर अपना ”विक्रम” मॉड्यूल उतारने की कोशिश करेगा और छह पहियों वाले रोवर ”प्रज्ञान” को चांद पर फिट कर देगा और इसके जरिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। जबकि चंद्रयान-1 यह कार्य नही कर पाया था। चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 किलोग्राम था जबकि चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है।

14. चन्द्रयान-2 के लक्ष्य क्या है?

चंद्रयान-2 का उद्देश्‍य चंद्रमा पर उतकर उसकी सतह के अध्‍ययन के लिए रोवर फिट करना है ताकि चंद्रयान-1 के वैज्ञानिक कार्यों का दायरा और बढ़ाया जा सके।

15. चंद्रयान-2 कितने उपकरण ले जा रहा है?

ऑर्बिटर में चंद्रमा की सतह का मानचित्र बनाने और वहां के वायुमंडल (बाहरी वातावरण) के अध्‍ययन के लिए आठ वैज्ञानिक पे-लोड रखे गये हैं। लैंडर में चंद्रमा की सतह और उपसतह के परीक्षणों के लिए तीन वैज्ञानिक पे-लोड लगाए गये हैं। रोवर में दो पे-लोड हैं जिनसे हमें चंद्रमा की सतह के बारे और ज्‍यादा जानकारी मिल सकेगी। नासा में भी एक अप्रत्‍यक्ष परीक्षण चंद्रयान-2 से किया जाएगा।

16. ऑर्बिटर,रोवर और लैंडर मिशन कितने समय तक चलेगा?

ऑर्बिटर का मिशन कार्यकाल एक वर्ष होगा जबकि लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) का कार्यकाल चंद्रमा के एक दिन यानि पृथ्‍वी के 14 दिनों का होगा।

17. चंद्रयान-2 को किस प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में छोड़ा गया?

चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एमके III एम-1 से अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा।

18. चन्द्रयान-2 मिशन के चुनौतीपूर्ण पहलू क्या है?

इस मिशन की कुछ तकनीकी चुनौतियाँ हैं:
1.चंद्रमा की सतह पर उतरते समय बेहद कम स्‍वचालित गति सुनिश्चित करने के लिए थौटलेवल इंजनों वाला प्रोपल्‍शन सिस्‍टम;
2.मिशन मैनेजमेंट-विभिन्‍न चरणों पर प्रोपलैंट मैनेजमेंट, इंजन जलाना, कक्षा(ऑर्बिट) और प्रक्षेप पथ (ट्रैवेलरी) का डिजाइन
लैंडर विकास-दिशा सूचक (‍नेविगेशन), निर्देशन और नियंत्रण, दिशा बताने और बाधा से बचने के लिए नेविगेशन सेंसर और आराम से उतरने के लिए लैंडर लौग मैकेनिज्‍म;
3.रोवर विकास- लैंडर मैकेनिज्‍म से रोल डाउन, चंद्रमा की सतह पर रोविंग मैकेनिज्‍म, पावर प्रणालियों का विकास और परीक्षण, थर्मल(तापीय) प्रणालियां, संचार और मोबिलिटी प्रणालियां

19. दुनिया कि अंतरिक्ष एजेंसियों ने चंद्रमा पर सॉफ़्ट लैंडिंग के कितनी बार प्रयास किए? कितनी बार सफलता प्राप्त की?

अभी तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के कुल 38 प्रयास किये गए हैं जिनमें से 52 प्रतिशत मौकों पर सफलता मिली है

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