Monday, June 1, 2020
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राजस्थान के मीठे व खारे पानी की प्रमुख झीले

झील जल का वह स्थिर भाग है जो चारो तरफ से स्थलखंडों से घिरा होता है | झीलों की दूसरी विशेषता इनका स्थायित्व है | सामान्य रूप से झील भूतल के वे विस्तृत गड्ढे हैं जिनमें जल भरा होता है | झीलों का जल प्रायः स्थिर होता है। राजस्थान में मीठे पानी और खारे पानी की दो प्रकार की झीलें हैं। खारे पानी की झीलों से नमक तैयार किया जाता है। मीठे पानी की झीलों का पानी पीने एंव सिंचाई के काम में आता है।

राजस्थान की मीठे पानी की झीलें

    राजस्थान के मीठे व खारे पानी की प्रमुख झीले
    मानचित्र : राजस्थान में मीठे पानी की झीलें

  1. जयसमन्द झील (ढ़ेबर झील) –  यह राजस्थान के मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है। यह उदयपुर जिले में स्थित है तथा इसका निर्माण राजा जयसिंह ने 1685-1691 ई० में गोमती नदी पर बाँध बनाकर करवाया गया था। यह बाँध 375 मी. लंबा और 35 मीटर ऊँचा है। यह झील लगभग 15 किमी लंबी और 8 किलोमीटर चौड़ी है। यह उदयपुर से 51 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसमें करीब 7 टापू हैं; जिसमें सबसे बड़ा “बाबा का भांगड़ा” व सबसे छोटा “प्यारी” जिसमें भील एंव मीणा जाति के लोग रहते हैं। इस झील से श्यामपुर तथा भाट नहरे बनाई गई हैं। इन नहरों की लंबाई क्रमश: 324 किलोमीटर और 125 किमी है। जयसमन्द झील पर “औदिया” “प्रासाद” बने हुए है।
  2. राजसमन्द झील –  यह उदयपुर से 64 किलोमीटर दूर कांकरौली स्टेशन के पास स्थित है। यह 6.5 किलोमीटर लंबी और 3 किलोमीटर चौड़ी है। इस झील का निर्माण 1662 ई० में उदयपुर के महाराणा राजसिंह के द्वारा गोमती नदी पर कराया गया। इसका पानी पीने एंव सिचाई के काम आता है। इस झील का उत्तरी भाग “नौ चौकी की पाल” के नाम से विख्यात है , जहां संगमरमर की 25 शिला लेखों पर मेंवाड़ का इतिहास “राजप्रशस्ति” संस्कृत भाषा में अंकित है। इस प्रशस्ती का उत्कीर्ण करने का श्रेय “रणछोड़ भट्ट तेलंग” को जाता है। इस झील के तट पर श्री द्वारकाधीश का वैभवशाली मंदिर स्थित है।
    नोट : राज प्रशस्ति को विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति माना जाता है।
  3. पिछोला झील –  यह उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध व बड़ी झील है। इसके बीच में स्थित दो टापूओं पर जगमंदिर और जगनिवास दो सुन्दर महल बने हैं। इन महलों का प्रतिबिंब झील में पड़ता है। इस झील का निर्माण राणा लाखा के शासन काल में एक बंजारे ने 14 वीं शताब्दी के अंत में करवाया था। बाद में इसे उदय सिंह ने इसे ठीक करवाया। यह झील लगभग 7 किलोमीटर चौड़ी है। यह झील उदयपुर की दूसरी प्रसिद्ध झील फ़तहसागर से जुड़ी है।
     नोट : शहज़ादा ख़ुर्रम (शाहजहाँ) ने विद्रोह करके यही आकर शरण ली थी।
  4. फ़तह सागर झील महाराणा जय सिंह जी द्वारा निर्मित झील का पुनः निर्माण महाराणा फ़तह सिंह जी द्वारा करवाया गया था इसी कारण इस झील को फ़तह सागर झील के नाम से जाना जाता है। इस झील की आधार शिला ड्यूक ऑफ़ कनाट ने रखी थी। इस झील में एक टापू है जहाँ नेहरु गार्डन व सौर वैधशाला बनी हुई है।
  5. आनासागर झील –  1137 ई० में इस झील का निर्माण अजमेर में आना जी/ अर्णोरज के द्वारा कराया गया। यह दो पहाड़ियों के बीच में बनाई गई है तथा इसकी परिधि 12 किलोमीटर है। जहाँगीर ने यहाँ एक सुभाष उद्यान/दौलत बाग बनवाया तथा शाहजहाँ के शासन काल में यहां एक बारादरी का निर्माण हुआ। पूर्णमासी की रात को चांदनी में यह झील एक सुंदर दृश्य उपस्थित करती है।
  6. नक्की झील –  यह एक प्राकृतिक झील है तथा यह माउंट आबू, सिरोही में स्थित है। किद्वंती है कि इस झील का निर्माण देवताओं द्वारा नाखूनों  से खोदकर किया गया था। यह झील लगभग 35 मीटर गहरी है। यह झील का कुल क्षेत्रफल 9 वर्ग किलोमीटर है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों का मुख्य केन्द्र है। राजस्थान की सबसे ऊँची पर टॉड रॉक व नन रॉक प्रसिद्ध है। 
  7. फाई सागरयह अजमेर में स्थित एक प्राकृतिक झील है। इसका निर्माण बांडी नदी पर इंजीनियर फ़ॉय के निर्देशन में हुआ था इसी कारण इसे फ़ाई सागर झील के नाम से जाना जाता है। इसका पानी आना सागर में भेज दिया जाता है क्योंकि इसमें वर्ष भर पानी रहता है।
  8. पुष्कर झील – यह अजमेर से 11 किलोमीटर दूर पुष्कर में स्थित हैं। इस झील के तीनों ओर पहाड़ियाँ है तथा इसमें सालों भर पानी भरा रहता है। यह राज्य की सबसे प्राचीन पवित्र एंव प्रकृतिक झील है। इस झील पर प्राचीन ब्रह्माजी व सावित्री जी का मंदिर बना हुआ है। इसे “हिंदुओ का पाँचवा तीर्थ” माना जाता है। यंहा कुल 52 घाट बने हुए है जिसमें गांधी घाट एतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यान प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला का आयोजन होता है।
  9. सिलीसेढ़ झील –  यह एक प्राकृतिक झील है तथा यह झील दिल्ली-जयपुर मार्ग पर अलवर से 12 किलोमीटर में स्थित है। इस झील के किनारे 1845 ई. में राजा विनय सिंह द्वारा रानी शिला के लिए शाही महलों का निर्माण करवाया गया था। 
अन्य झीलें –
  • बालसमन्द झील – यह झील जोधपुर के उत्तर में स्थित है तथा इसका पानी पीने के काम में आता है।
  • कोलायत झील – यह झील कोलायत में स्थित है जो बीकानेर से 47 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यहां कपिल मुनि का आश्रम है तथा हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला लगता है।
  • उदय सागर – यह उदयपुर से १३ किलोमीटर दूर स्थित है। इस झील का निर्माण उदयसिंह ने कराया था।
  • मानसरोवर झील – झालावाड़
  • बिसलसर झील – अजमेर 
  • कायलाना झील – जोधपुर 
  • भोपाल सागर झील – चित्तोडगढ़ 
  • गजनेर झील – बीकानेर
  • दूगारी झील – बूंदी 
  • पिथमपुर झील – सीकर 
  • काड़िया झील – झालावाड़ 
  • घडसिसर झील – जैसलमेर 
  • गैवसागर झील – डूंगरपुर 
  • तलवाड़ा झील – हनुमानगढ़ 
  • बूढ्हा जोहड – श्री गंगानगर 
  • बलसमंद झील – जोधपुर 

राजस्थान की खारे पानी की झीले

राजस्थान के मीठे व खारे पानी की प्रमुख झीले
मानचित्र : राजस्थान में खारे पानी की झीलें

Notes पढ़ने के लिए क्लिक करे – राजस्थान के लोकदेवता 
  1. साँभर झील – यह राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। इस झील का प्रवर्तक चौहान शासक वासुदेव को माना जाता है। यहाँ उत्पादित नमक उत्तम किस्म का होता है। यहाँ राज्य के कुल उत्पादन का 80% नमक तथा भारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7% नमक उत्पन्न किया जाता है। इसका अपवाह क्षेत्र लगभग 500 वर्ग किमी में फैला है जिसमे मेन्था, रूपनगढ़, खारी व खंडेला आदि नदियाँ आकर मिलती है। यह झील दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग 32 किमी लंबी तथा 3 से 12 किमी तक चौड़ी है। ग्रीष्मकाल में वाष्पीकरण की तीव्र दर से होने के कारण इसका आकार बहुत कम रह जाता है। इस झील में प्रतिवर्ग किमी क्षेत्र में 6000 टन नमक होने का अनुमान है। इसका क्षेत्रफल लगभग 140 वर्ग किमी है। यहां नमक उत्पादन सांभर साल्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है जिसकी स्थापना 1964 में की गई थी। यहां सोडियम सल्फेट संयंत्र स्थापित किया गया है जिससे 50 टन सोडियम सल्फेट प्रतिदिन बनाया जाता है। यह झील जयपुर व नागौर जिले की सीमा पर स्थित है तथा यह जयपुर की फुलेरा तहसील में जयपुर से लगभग 60 किमी दूर है। पर्यटन के क्षेत्र में इसे रामसर साइट के नाम से जाना जाता है।
  2. डीडवाना झील – यह नागौर जिले के डीडवाना नगर के समीप स्थित है। यह 10 वर्ग किमी में फैली है। इससे राजस्थान स्टेट साल्ट्स वर्क्स द्वारा नमक तैयार किया जाता है। यहाँ नमक का उत्पादन निजी इकाइयों द्वारा भी किया जाता है जिन्हें ‘देवल’ कहते हैं। इनमें नमक पुराने तरीके से बनाया जाता है। डीडवाना से 8 किमी दूर राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स डीडवाना, जिसकी स्थापना 1964 में की गई थी, द्वारा स्थापित सोडियम सल्फेट का संयंत्र भी है। यह क्षेत्र नमक उत्पादन की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ उत्पादित नमक की लागत कम आती है किन्तु यहाँ नमक में सोडियम सल्फेट की मात्रा अधिक होने की वजह से अखाद्य नमक का उत्पादन अधिक होता है जिसको बेचने में कठिनाई आती है।
  3. पचपद्रा झील – बाड़मेर जिले में पचपद्रा नगर के निकट यह स्थित है। यह लगभग 83 वर्ग किमी क्षेत्र मेँ स्थित है। यह वर्षा के जल पर निर्भर नहीं है बल्कि नियतवाही जल स्रोतों से इसे पर्याप्त खारा जल मिलता रहता है। यहाँ का नमक समुद्री नमक के समान होता है। इससे तैयार नमक में 98% तक सोडियम क्लोराइड की मात्रा होती है। यहाँ खारवेल जाति के लोग परम्परागत रूप से मोरली नामक झाड़ी से नमक बनाने का कार्य करते हैं। यहाँ राजस्थान स्टेट साल्ट्स वर्क्स, पंचपदरा (स्थापना- 1960) द्वारा खाद्य, अखाद्य, औद्योगिक व आयोडिन युक्त नमक तैयार किया जाता है।
  4. लूणकरणसर झील – यह बीकानेर के उत्तर-पूर्व में लगभग 80 किमी दूर स्थित है। इसके पानी में लवणीयता की कमी है अत: बहुत थोड़ी मात्रा में नमक बनाया जाता है। यह झील 6 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है। 
  5. पोकरण झील – यह जैसलमेर जिले में स्थित है। इससे उत्तम किस्म का नमक प्रतिवर्ष लगभग 6000 टन बनाया जाता है।
  6. फलौदी झील – यह जोधपुर जिले में स्थित है जिससे प्रतिवर्ष लगभग एक लाख टन नमक तैयार किया जाता है।
  7. कुचामन झील – नागौर जिले के कुचामन सिटी के परिक्षेत्र में स्थित इस झील से लगभग 12000 टन वार्षिक नमक बनाया जाता है।
  8. सुजानगढ़ झील – यह झील चुरु जिले में है तथा इससे लगभग 24000 टन वार्षिक नमक बनाया जाता है। कुचामन, फलौदी व सुजानगढ़ में कुओं से भी नमक बनाया जाता है।
  9. जाब्दीनगर – सांभर के निकट नागौर जिले में यह एक नया नमक स्रोत विकसित किया जा रहा है।
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