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नीति आयोग (योजना आयोग के स्थान पर)

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नीति आयोग (राष्टीय भारत परिवर्तन संस्थान)
1जनवरी,2015 को मंत्रीमंडल द्वारा इस सन्दर्भ में प्रथम प्रस्ताव पेश किया है।
पढ़े केसा होगा हमारा नया आयोग।
************संरचना************
अध्यक्ष:- भारत का प्रधान मंत्री (पदेन)
उपाध्यक्ष:- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त होगा (पूर्णकालिक)
सदस्य:-
• राज्यो के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रेदशो के प्रशासक (पूर्णकालिक)
• केंद्रीय मंत्री परिषद से अधिकम 4 सदस्य (पदेन)
• अग्रणी विश्वविद्यालयो तथा शोध संस्थानों से अधिकतम 2 सदस्य (अंशकालिक)
सचिव:- भारत सरकार का सचिव स्तर का अधिकारी।
*************कार्य************
• नीति आयोग ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तंत्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुंचाएगा।
• आयोग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा।
• इसके अतिरिक्‍त आयोग कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर जोर देगा।
**************उद्देश्य***********
• विकास की प्रक्रिया में निर्देश तथा रणनीतिक परामर्श देगा।
• नये भारत को एक प्रशासनिक बदलाव की जरूरत है, जिसमें सरकार एक ‘सक्षमकारी’ होगी न कि पहला और आखिरी सहारा।
· खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर कृषि उत्‍पादन के मिश्रण तथा किसानों को उनकी उपज से मिलने वाले वास्‍तविक लाभ पर ध्‍यान केन्द्रित किया जायेगा।
· भारत समान विचार वाले वैश्विक मुद्दों, खासकर जिन क्षेत्रों पर अपेक्षाकृत कम ध्‍यान दिया गया है, पर बहसों और विचार-विमर्शों में एक सक्रिय भूमिका अदा करेगा।
· आर्थिक रूप से जीवंत मध्‍यवर्ग की भागीदारी बनाये रखने के लिए इसकी क्षमता का पूर्ण दोहन सुनिश्‍चित किया जायेगा।
• उद्यमशीलता, वैज्ञानिक और बौद्धिक मानव पूंजी के भारत के भंडार का लाभ उठाया जाएगा।
· प्रवासी भारतीय समुदाय की भौगोलिक-आर्थिक और भौगोलिक-राजनीतिक ताकत को शामिल किया जाएगा।
· आधुनिक टेकनोलाजी के इस्‍तेमाल से संपूर्ण और सुरक्षित आवास सुविधा के लिए अवसर के रूप में शहरीकरण का इस्‍तेमाल किया जाएगा।
· शासन में जटिलता और परेशानियों की संभावनाओं को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाएगा
************तथ्य*************
15 मार्च,1950 को योजना आयोग की स्थापना एक कार्यलयी आदेश द्वारा की गई थी जिसे 15 अगस्त,2014 को प्रधान मंत्री ने समाप्त कर पुनर्गठन की घोषणा की थी।
‘सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है’ अर्थात् नीति आयोग द्वारा राज्यो की सतत् एवं वास्तविक भागीदारीता सुनिश्चित की जा रही है जो पूर्व योजना आयोग में नही थी।
पढ़े मंत्री मंडल द्वारा जारी प्रेस नोट-
Press note
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